RPSC School Lecturer भर्ती: अब खत्म होगी 40% की अनिवार्यता!
जानिए क्या है नया फॉर्मूला, राजस्थान GK का वेटेज क्यों बढ़ाना जरूरी है और अभ्यर्थियों को अभी से क्या तैयारी करनी चाहिए।
पिछले कुछ दिनों से RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग) की भर्ती प्रक्रिया को लेकर उम्मीदवारों में जबरदस्त चर्चा और नाराज़गी देखने को मिली। आयोग द्वारा लगातार ऐसे कठिन और गहराई से जुड़े सवाल पूछे जा रहे थे, जो सीधे स्कूल स्तर की पढ़ाई से मेल नहीं खाते थे — जिस पर उम्मीदवारों ने तीखे सवाल उठाए कि क्या आयोग स्कूल के लिए शिक्षक चुन रहा है या फिर किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी तैयार कर रहा है।
बढ़ते दबाव के बीच अब RPSC ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है — School Lecturer भर्ती में लागू 40% अंकों की अनिवार्यता को खत्म करने का निर्णय। नए फॉर्मूले के तहत सामान्य पेपर और विषय (सब्जेक्ट) पेपर के अंकों को जोड़कर कुल मिलाकर 40% अंक लाने होंगे, न कि अलग-अलग दोनों पेपर में अनिवार्य रूप से पास होना होगा।
आखिर विवाद शुरू कैसे हुआ?
अभ्यर्थियों की शिकायत थी कि जो प्रश्न पूछे जा रहे थे, वे मानो किसी बहुत महंगी और दुर्लभ किताब से उठाए गए हों — इतने कठिन कि सामान्य तैयारी करने वाला विद्यार्थी उन्हें हल ही नहीं कर पाता। इससे यह आशंका जताई जाने लगी कि कहीं आयोग जानबूझकर सीटें खाली रखकर वेतन-भुगतान से बचना तो नहीं चाहता, ताकि बाद में यह कहा जा सके कि भर्ती तो निकाली गई थी लेकिन योग्य उम्मीदवार मिले ही नहीं।
तो क्या यह पूरी तरह राहत की बात है?
ऊपरी तौर पर यह उम्मीदवारों के हित में लिया गया फैसला लगता है, लेकिन इसके साथ एक बड़ा खतरा भी जुड़ा है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। असल समस्या फर्स्ट पेपर के पैटर्न में छिपी है।
राजस्थान GK का वेटेज क्यों जरूरी है?
अगर फर्स्ट पेपर में सामान्य विज्ञान, अंग्रेज़ी और गणित जैसे विषयों पर ज्यादा फोकस रखा गया और राजस्थान GK को कम अहमियत दी गई, तो इसका सीधा नुकसान राजस्थान के मूल निवासी विद्यार्थियों को होगा। ऐसे विषयों में देश के किसी भी राज्य का विद्यार्थी बराबरी से मुकाबला कर सकता है — जबकि राजस्थान GK ऐसा विषय है जिसमें राज्य के विद्यार्थियों को स्वाभाविक बढ़त मिलती है।
इसका एक व्यावहारिक उदाहरण भी मौजूद है — RPSC Assistant Professor भर्ती में एक पूरा पेपर राजस्थान GK पर आधारित होता है, और यही वजह है कि इस भर्ती में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थी बहुत कम संख्या में सिलेक्ट हो पाते हैं। इसके उलट, REET Level-1 जैसी परीक्षाओं में जहां राजस्थान GK का हिस्सा कमजोर रहा, वहां दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई।
अभ्यर्थियों के लिए इसका क्या मतलब है?
- 40% अनिवार्यता हटने से पेपर पास करने का दबाव कुछ हद तक कम होगा।
- लेकिन अगर फर्स्ट पेपर में राजस्थान GK का हिस्सा कम रहा, तो प्रतिस्पर्धा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है।
- राज्य के विद्यार्थियों को अभी से इस मुद्दे पर आवाज़ उठानी होगी ताकि वेटेज संतुलित रखा जाए।
- तैयारी करते समय राजस्थान GK को नज़रअंदाज़ बिल्कुल न करें, चाहे सिलेबस में इसका हिस्सा फिलहाल कम ही क्यों न हो।
आपकी राय क्या है?
क्या राजस्थान GK का वेटेज बढ़ना चाहिए? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताएं और इस जानकारी को उन साथियों तक पहुंचाएं जो RPSC की तैयारी कर रहे हैं।
निष्कर्ष
RPSC का यह फैसला निश्चित रूप से अभ्यर्थियों को थोड़ी राहत देगा, लेकिन असली मुद्दा फर्स्ट पेपर के पैटर्न और उसमें राजस्थान GK की हिस्सेदारी का है। जब तक इस पेपर में राज्य से जुड़े ज्ञान को उचित वेटेज नहीं मिलता, तब तक यह बदलाव अधूरा ही माना जाएगा। इसलिए अभ्यर्थियों को संगठित होकर इस मांग को आयोग और सरकार तक पहुंचाना होगा।

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