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Jodhpur Pink Pond: जोधपुर के तनावड़ा तालाब का पानी गुलाबी क्यों हुआ? जानें वैज्ञानिक कारण और जोजरी नदी प्रदूषण का सच

जोधपुर का तनावड़ा तालाब गुलाबी क्यों हुआ?

जोधपुर के तनावड़ा तालाब का पानी अचानक गुलाबी कैसे हो गया?

21 जुलाई 2026 · राजस्थान करेंट अफेयर्स
तनावड़ा तालाब गुलाबी पानी

जोधपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित तनावड़ा गांव के तालाब का पानी इन दिनों गुलाबी रंग का हो गया है पहले इस तालाब के पानी का इस्तेमाल पीने के लिए भी किया जाता था, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि यह पानी मवेशियों के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता

तनावड़ा गांव जोजरी नदी के पास बसा हुआ है जून महीने में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने इस तालाब के पानी के नमूने इकट्ठे किए, जिनकी जांच में बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए

जांच में क्या पाया गया

पानी की गुणवत्ता मापने के लिए तीन मुख्य मानकों की जांच की जाती है — TDS, COD और BOD। तीनों ही आंकड़े सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा पाए गए।

मानकसुरक्षित सीमातालाब में मिली मात्रा
TDS500 mg/लीटर तक55,700 mg/लीटर
COD10 mg/लीटर1,394 mg/लीटर
BOD1–3 mg/लीटर306 mg/लीटर

TDS का मतलब है पानी में घुले हुए ठोस पदार्थों की मात्रा। COD बताता है कि पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों को तोड़ने के लिए कितनी ऑक्सीजन चाहिए। BOD यह बताता है कि पानी में मौजूद जैविक तत्वों को बैक्टीरिया द्वारा तोड़ने के लिए कितनी ऑक्सीजन ज़रूरी है। तीनों आंकड़े दिखाते हैं कि तालाब में प्रदूषण का स्तर कितना ज्यादा बढ़ चुका है।

प्रदूषण नियंत्रण मंडल की जांच करने वाली संस्था

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल एक वैधानिक संस्था है, जिसका गठन जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 के तहत फरवरी 1975 में हुआ था। बाद में वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के जरिए इसकी जिम्मेदारियों का विस्तार किया गया। आज यह संस्था राजस्थान में जल, वायु और मृदा प्रदूषण को नियंत्रित करने का काम करती है।

जोजरी नदी और सुप्रीम कोर्ट का फैसला

तनावड़ा गांव के पास बहने वाली जोजरी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही एक बड़ा फैसला दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संदीप लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी, जिसका मकसद जोजरी नदी का संरक्षण और पुनर्जीवन करना था।

जांच में सामने आया कि कई औद्योगिक इकाइयां पाइपलाइन के जरिए अवैध तरीके से अपना अपशिष्ट जल जोजरी नदी में डाल रही थीं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 300 से ज्यादा ऐसी इकाइयों पर प्रतिबंध लगा दिया। माना जा रहा है कि जोजरी नदी का पानी रिसकर तनावड़ा तालाब में भी पहुंच रहा हो सकता है।

प्रदूषण के संभावित कारण

पहला कारण महोत्सवों के दौरान होने वाला मूर्ति विसर्जन माना जा रहा है, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है जबकि गुलाबी पानी की समस्या सिर्फ एक साल से देखी जा रही है। दूसरा कारण यह है कि आसपास की औद्योगिक इकाइयां टैंकर के जरिए चोरी-छिपे अपशिष्ट जल तालाब में डाल रही हों। तीसरा कारण पाइपलाइन के जरिए अवैध रिसाव माना जा रहा है, हालांकि जांच में अभी तक किसी पाइपलाइन के सबूत नहीं मिले हैं। दो टेक्सटाइल इकाइयां जो जांच में शक के दायरे में आई थीं, उन्हें पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है।

समाधान के लिए क्या किया जा रहा है

राजस्थान सरकार ने जोजरी नदी और तनावड़ा तालाब के प्रदूषित पानी को उपचारित करने की जिम्मेदारी NEERI यानी नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट को सौंपी है। इसका मुख्यालय नागपुर में है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी, तब इसका नाम केंद्रीय जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान था। 1974 में इंदिरा गांधी सरकार ने इसका नाम बदलकर नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट कर दिया। यह संस्था पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान खोजने का काम करती है।

तालाब के पानी का रंग गुलाबी ही क्यों हुआ

आमतौर पर जब पानी में औद्योगिक रसायन, डाई या भारी मात्रा में घुले हुए लवण मिल जाते हैं, तो पानी का रंग बदल जाता है। तनावड़ा तालाब के मामले में विशेषज्ञों का मानना है कि पानी में मौजूद बैक्टीरिया की कुछ प्रजातियां, जो अत्यधिक खारे और प्रदूषित वातावरण में पनपती हैं, गुलाबी रंग के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसी स्थिति तब बनती है जब पानी में नमक और रसायनों की मात्रा सामान्य से बहुत ज्यादा बढ़ जाती है — जैसा कि यहां TDS के आंकड़ों से भी साफ पता चलता है।

स्थानीय लोगों पर असर

गांव वालों का कहना है कि यह तालाब पहले पीने के पानी और मवेशियों के लिए रोजमर्रा के इस्तेमाल का मुख्य स्रोत था। अब पानी की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि न तो इंसान और न ही जानवर इसे इस्तेमाल कर पा रहे हैं। इससे गांव में पानी की एक नई समस्या खड़ी हो गई है, और लोगों को दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।

आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं

जानकारों के अनुसार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए तीन चीजें जरूरी हैं — पहला, तालाब में मिल रहे प्रदूषित पानी के स्रोत का सटीक पता लगाना; दूसरा, आसपास की औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी बढ़ाना ताकि अवैध रूप से अपशिष्ट जल न छोड़ा जाए; और तीसरा, तालाब के पानी को उपचारित (treat) करने के लिए तकनीकी उपाय अपनाना, जिसकी जिम्मेदारी अब NEERI को दी गई है। साथ ही जोजरी नदी के प्रदूषण पर भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम जारी है, जिससे उम्मीद है कि आसपास के इलाकों में पानी की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

निष्कर्ष

तनावड़ा तालाब का गुलाबी पानी सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण की एक गंभीर मिसाल है। सरकार और प्रदूषण नियंत्रण मंडल इस मामले की जांच कर रहे हैं, और उम्मीद है कि NEERI की मदद से जल्द इसका समाधान निकलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q: तनावड़ा गांव किस जिले में है?
A: तनावड़ा गांव राजस्थान के जोधपुर जिले में, जोधपुर शहर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

Q: राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की स्थापना कब हुई थी?
A: इसकी स्थापना फरवरी 1975 में जल प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 के तहत हुई थी।

Q: NEERI का पूरा नाम और मुख्यालय कहां है?
A: NEERI का पूरा नाम नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट है, और इसका मुख्यालय नागपुर में है।

Q: जोजरी नदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
A: सुप्रीम कोर्ट ने संदीप लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी और 300 से ज्यादा औद्योगिक इकाइयों पर अपशिष्ट जल छोड़ने को लेकर प्रतिबंध लगाया था।

करेंट अफेयर्स क्विज़:
पीने के पानी में TDS की स्वीकार्य सीमा कितनी होती है?

(1) 100 मिलीग्राम प्रति लीटर  
(2) 250 मिलीग्राम प्रति लीटर  
(3) 500 मिलीग्राम प्रति लीटर  
(4) 1000 मिलीग्राम प्रति लीटर


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