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Biotechnology One Shot Revision - पूरा चैप्टर एक बार में

Biotechnology One Shot Revision - पूरा चैप्टर एक बार में
⚡ One Shot Revision

Biotechnology One Shot Revision पूरा चैप्टर एक बार में

NCERT Biology का पूरा बायोटेक्नोलॉजी चैप्टर आसान भाषा में फटाफट रिवाइज करो

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बायोटेक्नोलॉजी क्या होती है समझो

बायोटेक्नोलॉजी का मतलब है प्रकृति में मौजूद जीवाणु फंगस पौधे और जानवर इनके अंदर जो नेचुरल प्रोसेस चलते हैं उन्हें साइंस की मदद से इंसानों के फायदे के लिए इस्तेमाल करना यह चैप्टर दो बड़े हिस्सों में बंटा हुआ है पहला हिस्सा बताता है कि जीन को कैसे काटा जाता है कैसे जोड़ा जाता है और कैसे एक नए होस्ट में डाला जाता है दूसरा हिस्सा बताता है कि यह टेक्नोलॉजी खेती दवाई और इंसानों की बीमारियों में कैसे काम आती है

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रीकॉम्बिनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी के टूल्स जानो

इस टेक्नोलॉजी के तीन मुख्य टूल होते हैं पहला रिस्ट्रिक्शन एंजाइम जो डीएनए को एक तय जगह पर काटता है दूसरा वेक्टर यानी वो प्लास्मिड जो कटे हुए जीन को होस्ट सेल तक पहुंचाने का काम करता है तीसरा होस्ट ऑर्गेनिज्म जैसे बैक्टीरिया जिसके अंदर यह नया जीन जाकर काम करना शुरू करता है

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रिस्ट्रिक्शन एंजाइम कैसे काम करता है सीखो

रिस्ट्रिक्शन एंजाइम को मॉलिक्यूलर सिजर भी कहा जाता है यह डीएनए के अंदर एक खास सीक्वेंस को पहचानता है जिसे पैलिनड्रोमिक सीक्वेंस कहते हैं वहीं जाकर यह डीएनए को काट देता है और दो टुकड़े बना देता है EcoRI इसका सबसे मशहूर उदाहरण है जो हर बायोलॉजी स्टूडेंट को याद रहता है

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प्लास्मिड और वेक्टर की भूमिका समझो

प्लास्मिड बैक्टीरिया के अंदर मौजूद एक गोल छोटा डीएनए होता है जो मेन क्रोमोसोम से अलग होता है इसे जीन का टैक्सी भी कहा जा सकता है क्योंकि यह जीन को उठाकर होस्ट सेल तक ले जाता है एक अच्छे वेक्टर में ओरिजिन ऑफ रेप्लिकेशन सिलेक्टेबल मार्कर और क्लोनिंग साइट होनी चाहिए pBR322 इस चैप्टर का सबसे पॉपुलर प्लास्मिड वेक्टर है

ओरिजिन ऑफ रेप्लिकेशन सिलेक्टेबल मार्कर और क्लोनिंग साइट यह तीनों वेक्टर के सबसे जरूरी पार्ट्स हैं और एग्जाम में बार बार पूछे जाते हैं
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पीसीआर टेक्निक फटाफट रिवाइज करो

पीसीआर का मतलब है पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन इसकी मदद से डीएनए की बहुत कम मात्रा को भी लाखों कॉपी में बदला जा सकता है इसमें तीन स्टेप बार बार दोहराए जाते हैं डिनेचरेशन एनीलिंग और एक्सटेंशन Taq पॉलीमरेज़ एंजाइम इस प्रोसेस की जान होता है क्योंकि यह हाई टेंपरेचर पर भी काम करता रहता है

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जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस एक बार में क्लियर करो

डीएनए के टुकड़ों को उनके साइज के हिसाब से अलग करने के लिए जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस इस्तेमाल होता है अगारोज़ जेल के अंदर डीएनए के सैंपल डाले जाते हैं और करंट पास किया जाता है छोटे टुकड़े तेजी से आगे बढ़ते हैं और बड़े टुकड़े पीछे रह जाते हैं इसी बैंड पैटर्न को देखकर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग जैसे काम भी किए जाते हैं

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rDNA टेक्नोलॉजी के पूरे स्टेप्स याद करो

पहला स्टेप है डीएनए आइसोलेशन जिसमें सेल से शुद्ध डीएनए निकाला जाता है दूसरा स्टेप है फ्रैगमेंटेशन जिसमें रिस्ट्रिक्शन एंजाइम से डीएनए काटा जाता है तीसरा स्टेप है वेक्टर के साथ जोड़ना जिसे लाइगेशन कहते हैं चौथा स्टेप है इस नए डीएनए को होस्ट सेल में डालना जिसे ट्रांसफॉर्मेशन कहते हैं आखिर में सही ट्रांसफॉर्मेंट सेल को सिलेक्ट करके उसे कल्चर में बढ़ाया जाता है

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डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग भी जान लो

जब बैक्टीरिया के अंदर वांछित प्रोटीन बन जाता है तो उसे शुद्ध रूप में निकालना जरूरी होता है इस पूरे प्रोसेस को डाउनस्ट्रीम प्रोसेसिंग कहा जाता है इसमें प्रोडक्ट को अलग करना उसे प्योर करना और फिर एक स्टेबल फॉर्म में पैक करना शामिल है यह स्टेप दवाइयों की क्वालिटी तय करने में सीधे काम आता है

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खेती में बायोटेक्नोलॉजी कैसे इस्तेमाल होती है समझो

Bt कॉटन इस टॉपिक का सबसे बड़ा उदाहरण है बैसिलस थुरिनजिएंसिस नाम के बैक्टीरिया से एक टॉक्सिन जीन लिया जाता है और कॉटन के पौधे में डाला जाता है यह टॉक्सिन कीड़ों की आंत में जाकर उन्हें मार देता है लेकिन इंसानों के लिए यह सेफ रहता है इसी वजह से किसानों को कीटनाशक कम इस्तेमाल करना पड़ता है और पैदावार भी बढ़ जाती है

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आरएनए इंटरफेरेंस वाला टॉपिक भी ठीक से पढ़ो

तंबाकू के पौधे में नेमाटोड नाम का कीड़ा जड़ों को नुकसान पहुंचाता है साइंटिस्ट ने आरएनए इंटरफेरेंस तकनीक का इस्तेमाल करके नेमाटोड के जरूरी जीन को साइलेंट कर दिया जिससे नेमाटोड पौधे के अंदर सर्वाइव नहीं कर पाया यह जेनेटिक इंजीनियरिंग का एक बहुत स्मार्ट इस्तेमाल माना जाता है

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मेडिसिन में बायोटेक्नोलॉजी का कमाल देखो

इंसुलिन बनाने के लिए पहले जानवरों के पैंक्रियास से इंसुलिन निकाला जाता था अब जेनेटिक इंजीनियरिंग से बैक्टीरिया के अंदर ह्यूमन इंसुलिन जीन डाला जाता है और इसे ह्यूमेलिन कहा जाता है यह इंसुलिन इंसानों के शरीर के लिए बिल्कुल परफेक्ट मैच करता है डायबिटीज के मरीजों के लिए यह डिस्कवरी एक बहुत बड़ा वरदान साबित हुई

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जीन थेरेपी का कॉन्सेप्ट भी क्लियर करो

जीन थेरेपी में किसी बीमारी की जड़ यानी खराब जीन को ठीक किया जाता है ADA डेफिशिएंसी नाम की बीमारी में बच्चे का इम्यून सिस्टम सही से काम नहीं करता इसमें सही जीन को बच्चे के शरीर में डालकर उसकी इम्यूनिटी को ठीक करने की कोशिश की जाती है यह टॉपिक बोर्ड एग्जाम में बहुत बार पूछा जाता है इसलिए इसे अच्छे से याद रखना

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मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस और ट्रांसजेनिक एनिमल्स भी कवर करो

पीसीआर और एलिसा टेस्ट की मदद से बीमारियों का पता बहुत जल्दी और सटीक तरीके से लगाया जा सकता है एड्स कैंसर और कई जेनेटिक डिसऑर्डर इसी तकनीक से डिटेक्ट किए जाते हैं ट्रांसजेनिक एनिमल्स वो जानवर होते हैं जिनके डीएनए में बाहर से कोई जीन डाला जाता है इनका इस्तेमाल दवाइयां टेस्ट करने और नई बीमारियों को समझने के लिए किया जाता है

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बायोसेफ्टी और जीएम फसलों का मुद्दा भी समझो

जब भी कोई नई जीएम फसल बनाई जाती है तो उसे इंसानों और पर्यावरण के लिए सेफ साबित करना जरूरी होता है भारत में GEAC नाम की संस्था इन फसलों को मंजूरी देने का काम करती है बायोपाइरेसी का मतलब है बिना इजाज़त किसी देश के नेचुरल रिसोर्स या पारंपरिक ज्ञान का इस्तेमाल करना यही वजह है कि पेटेंट और कार्टाजेना प्रोटोकॉल जैसे नियम बनाए गए हैं

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अगर तुम्हें यह पूरा टॉपिक एक ही जगह पीडीएफ फॉर्मेट में चाहिए तो नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके अभी डाउनलोड कर लो और इसे बार बार पढ़कर एग्जाम की तैयारी मजबूत बनाओ

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